रेवती रमण के संबंधों के आगे मोदी की गारंटी कमजोर
रेवती रमण के संबंधों के आगे मोदी की गारंटी कमजोर प्रयागराज। राजनीति में सारे विकल्प खुले रहते हैं। सपा से कॉग्रेस में आए उज्ज्वल रमण सिंह की मौजूदा राजनीति इसी की पुष्टि कर रही है। सिंह के यूटर्न से चार दशक से हाशिए पर रहा कॉग्रेस खेमा गुलजार हो गया है और लोकसभा चुनाव में अब तक की स्थिति में वह सत्ता पक्ष के सामने कड़ीं चुनौती पेश कर रहे हैं। चर्चाओं पर गौर करें तो मोदी की गारंटी पर कुँवर परिवार के सम्बंध भारी पड़ रहे हैं। इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में कॉंग्रेस नेता के पी तिवारी ने वर्ष 84 में अंतिम बार जीत दर्ज की थी। इसके बाद पार्टी का प्रदर्शन गिरता गया। इसकी वजह पार्टी की खेमेबाजी रही और पार्टी के नेता ही आत्मघाती बनते रहे और पार्टी संगठन बिखरता गया। चुनाव दर चुनाव पार्टी का प्रदर्शन गिरता गया और कभी एक नंबर की पार्टी रही कॉग्रेस को नंदी एक यैसे प्रत्याशी रहे जिन्होंने एक लाख मतों का आंकड़ा पार किया था। बीते चुनाव में योगेश शुक्ल मात्र 60 हजार मतों तक ही सीमित रह गए थे। यह 60 हजार मत पार्टी से अधिक योगेश के निजी संम्बंधों की वजह से ही मिले थे। कॉग्रेस प्रत्याशी उज्ज्...