पहाड़ी गांवों में गहराया पेयजल संकट, बेलन नदी के सहारे जीवन
प्रमुख समाचार, मांडा (प्रयागराज)।
भीषण गर्मी और लगातार गिरते जलस्तर ने मांडा के पहाड़ी क्षेत्रों में पेयजल संकट को गंभीर बना दिया है। अधिकांश कुएं और हैंडपंप या तो सूख चुके हैं या उनमें से कीचड़युक्त पानी निकल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है।
मांडा विकासखंड के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र उपरौध के कई गांव हर वर्ष गर्मियों में जल संकट का सामना करते हैं। इस वर्ष भी पूरा पांडेय, मेंहा, दोहथा, कूदर, नेवारी, परोहनी, मंगरौल, बदौआ और परसीधी समेत कई गांवों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पूरा पांडेय ग्राम पंचायत की आदिवासी बस्ती के सैकड़ों लोग कई महीनों से बेलन नदी के पानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों को इसी नदी के पानी का उपयोग पीने, स्नान और अन्य दैनिक कार्यों के लिए करना पड़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
पेयजल संकट बना पलायन की वजह
हाटा और मझिगवां न्याय पंचायत क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए पेयजल सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि हर वर्ष अप्रैल के अंत तक क्षेत्र के संपन्न परिवार अपने मवेशियों को रिश्तेदारों के यहां भेजकर परिवार समेत शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ जलस्रोत जवाब दे देते हैं और जीवन यापन मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार उपरौध क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन गांव हर साल इस समस्या से जूझते हैं। अप्रैल के अंत तक जलस्तर तेजी से नीचे चला जाता है और मई-जून में स्थिति विकट हो जाती है। जलस्तर गिरने के कारण हैंडपंपों और कुओं का पानी भी मटमैला और कीचड़युक्त हो गया है।
वहीं एडीओ पंचायत मांडा अरुण कुमार का कहना है कि क्षेत्र में अभी पेयजल की गंभीर समस्या नहीं है। उनके अनुसार 23 ग्राम पंचायतों के पास पानी के टैंकर उपलब्ध हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि जमीनी स्थिति प्रशासनिक दावों से अलग है और कई बस्तियों में लोग आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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फोटो AI
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