हाईकोर्ट ने डॉ. शमीम अख्तर को बताया निर्दोष;खंडपीठ ने कहा, आरोपों के समर्थन में नहीं मिले ठोस साक्ष्य
हाईकोर्ट ने डॉ. शमीम अख्तर को बताया निर्दोष
मेजा (प्रयागराज)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेजा में तैनात अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार डॉ. शमीम अख्तर पर निजी स्वार्थ साधने, आशा बहुओं को बरगलाकर तहसील में प्रदर्शन कराने तथा सरकारी कार्यों की अनदेखी करते हुए पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगा कर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। इस पर गुरुवार को न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) में सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले का निस्तारण गुण दोष के आधार पर किया गया है और लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सिद्ध नहीं होते हैं। इसके साथ ही 14 मई 2026 को याचिका को खारिज कर दिया गया। न्यायालय के इस फैसले के बाद डॉ. शमीम अख्तर को आरोपों से पूर्ण राहत मिल गई है।
डॉ. शमीम अख्तर ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और आज सत्य की जीत हुई है। मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद थे। मैं हमेशा अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करता रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना ही मेरी प्राथमिकता है। इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली है और कर्मचारियों में इस फैसले को लेकर सकारात्मक चर्चा रही।
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