प्रयागराज: फीस, यूनिफॉर्म और किताबों में मनमानी पर सख्त, डीएम ने दिए कड़े निर्देश

प्रयागराज: फीस, यूनिफॉर्म और किताबों में मनमानी पर सख्त, डीएम ने दिए कड़े निर्देश

नियत दुकान से खरीद के लिए बाध्य नहीं करेंगे स्कूल, शिकायत के लिए डीआईओएस व नगर मजिस्ट्रेट बने नोडल अधिकारी

प्रयागराज, 10 अप्रैल। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को संगम सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में निजी विद्यालयों द्वारा फीस, किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर की जा रही मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम निर्देश जारी किए गए।
जिला विद्यालय निरीक्षक पी.एन. सिंह ने बताया कि उ.प्र. स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 के तहत सभी वित्तविहीन विद्यालय—चाहे वे CBSE, CISCE या यूपी बोर्ड से संबद्ध हों—अपनी शुल्क संरचना को विद्यालय की वेबसाइट और सूचना पट पर प्रदर्शित करने के लिए बाध्य हैं। साथ ही, निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली पूरी तरह प्रतिबंधित है और प्रत्येक भुगतान पर अभिभावकों को विधिवत रसीद देना अनिवार्य होगा।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि कोई भी विद्यालय किसी छात्र या अभिभावक को किसी विशेष दुकान से किताबें, ड्रेस, जूते या मोजे खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यदि ऐसा पाया जाता है तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित विद्यालय पर कार्रवाई की जाएगी।
फीस वृद्धि को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय केवल शिक्षकों के वेतन में हुई औसत वृद्धि के अनुरूप ही फीस बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, यह वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और छात्रों से वसूली गई कुल फीस के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि हाल के दिनों में अभिभावकों की ओर से फीस वृद्धि, किताबों और यूनिफॉर्म में अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इन शिकायतों के निस्तारण के लिए नगर मजिस्ट्रेट और जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रयागराज को संयुक्त रूप से नोडल अधिकारी नामित किया गया है। अभिभावक इन दोनों कार्यालयों में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश दिए कि जनपद के सभी निजी विद्यालयों से पिछले तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, पिछले पांच वर्षों की फीस का विस्तृत विवरण तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन और वार्षिक वेतन वृद्धि की जानकारी एक सप्ताह के भीतर प्राप्त की जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 15 दिनों बाद समिति की पुनः बैठक आयोजित कर इन दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी। जिन विद्यालयों में अनियमितताएं पाई जाएंगी या जो निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नियमों के उल्लंघन पर पहली बार एक लाख रुपये, दूसरी बार पांच लाख रुपये का अर्थदंड और तीसरी बार विद्यालय की मान्यता निरस्त करने तक की कार्रवाई का प्रावधान है। प्रशासन के इस सख्त रुख से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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