‘मेरे राम जी उतरेंगे पार...’ भक्ति और समानता का अद्भुत संदेश — श्रीराम कथा में केवट प्रसंग ने श्रोताओं को किया भावविभोर
‘मेरे राम जी उतरेंगे पार...’ भक्ति और समानता का अद्भुत संदेश — श्रीराम कथा में केवट प्रसंग ने श्रोताओं को किया भावविभोर
मेजा, प्रयागराज। मेजा क्षेत्र के टाई सरैया (सोनारकातारा) में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन शुक्रवार को कथा वाचक गौरांगी गौरी ने श्रीराम वनगमन और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान जब उन्होंने गाया — “मेरे राम जी उतरेंगे पार हे गंगा मैया धीरे बहो...” तो पूरा पंडाल जयघोषों और भक्ति रस से गूंज उठा। भक्तजन भावविभोर होकर झूम उठे।
गौरांगी गौरी ने कहा कि जब भगवान श्रीराम गंगा तट पर पहुंचे, तो केवट ने उनके चरण धोने की इच्छा व्यक्त की। उसने कहा —
“प्रभु! पिछले जन्म में आपके चरणों के स्पर्श से एक पत्थर भी नारी बन गई थी। अगर आपकी चरण धूल मेरी नाव पर पड़ गई, तो यह नाव भी पार हो जाएगी। तब मैं किसे पार कराऊँगा... मैं तो भूखा रह जाऊँगा।”
अर्थ: यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि सच्ची भक्ति जात-पात, पद या धन नहीं देखती। केवट ने सेवा को ही अपना धर्म माना। भगवान के चरणों को धोकर उस चरणामृत का पान किया, और फिर राम, सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराया।
कथा में यह संदेश दिया गया कि भक्ति और समानता ही सच्चे धर्म के आधार हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि भगवान के समक्ष सब समान हैं।
कथावाचक ने कहा कि केवट ने भगवान से उतराई लेने से इंकार करते हुए कहा —
“मैं आपको इस पार लगाता हूँ, आप मुझे उस पार — अर्थात भवसागर से — पार लगाइए।”
कथा स्थल पर उरुवा प्रमुख प्रतिनिधि प्रमुख सहयोगी भोला गौतम सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजक प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि 2 नवम्बर को 11 कन्याओं के सामूहिक विवाह के साथ कथा का समापन होगा, जिसके मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद होंगे।
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