ऐसा स्वास्थ्य केन्द्र जहां 40 वर्षों में कोई डाक्टर ही नहीं पहुंचा
मेजा ,प्रयागराज। तहसील क्षेत्र मेजा के उप स्वास्थ्य केंद्र परानीपुर का मामला चर्चा में हैं जहाँ 40 वर्ष में कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा है। क्षेत्र में लाखों की लागत से बने दो स्वास्थ्य केंद्र वीरान पड़े हैं। झाड़ और घास फूस से भरे पड़े इन स्वास्थ्य केंद्रों को लेकर एक बड़ा सवाल है कि जब केंद्रों को संचालित नही करना था तो सरकार के लाखों रुपए क्यों खर्च किए गए।
प्रयागराज जिले से 60 किमी दूर मेजा के परानीपुर ग्राम पंचायत में 40 वर्षों पूर्व सन 1985 में 33 लाख की लागत से तत्कालीन सांसद व फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन द्वारा नवीन उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। वह यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवंती नंदन बहुगुणा को हराकर सांसद बने थे। उन्होंने इस केंद्र का निर्माण कराकर खुदलोकार्पण भी किया था। लेकिन यह केंद्र अफसरों की उदासीनता की भेंट चढ़ गया। 40 वर्षों बाद भी केंद्र में चिकित्सकों की तैनाती न होने से उक्त गांव के तरीबन 14 हजार की आबादी के लोगो को स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल सका।
स्थानीय ग्रामीण दिलीप पांडेय, लवकुश शुक्ला, सोनम, मिथिलेशकुमारी यादव, गुड्डी देवी, लतीफ, अजय शुक्ला सहित तमाम लोगों ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र के अभाव में लोगो को इलाज के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। तमाम शिकायती पत्रों के बाद भी अधिकारी कुंभकर्णी नीद से नहीं जगे। ग्रामीणों ने रविवार को बैठक कर रणनीति बनाई की तहसील मुख्यालय मेंसोमवार को भारी तादात में ग्रामीण धरना प्रदर्शन करेंगे। यह संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसका संज्ञान लेकर सीएमओ अरुण कुमार तिवारी ने रामनगर सीएचसी के अधीक्षक डा चंद्रशेखर गुप्ता को तत्काल मौके पर भेजकर स्वाथ्य केंद्र की हकीकत की जानकारी ली।अधीक्षक रामनगर ने मौके का मुआयना कर जल्द भवनों का मरम्मतीकरण कराकर चिकित्सको की तैनाती की बात कही। आगे कहा की जल्द ही ग्रामीणों को इलाज की सुविधा उपलब्ध करा दी जायेगी। अधीक्षक के इस आश्वासन से जनता संतुष्ट नहीं है। लोगों का कहना है कि इस तरह के आश्वासन पहलेभी मिल चुके हैं लेकिन केंद्र के गेट कभी नहीं खुले। लोगों ने कहा केंद्र चालू करने के लिए सीएमओ को पत्र दिया गया है। जिलाधिकारी से भी इसके लिए मांग की जाएगी।
लाखों रुपये का कौन देगा हिसाब क्षेत्र में चिलबिला और पौसिया चौहान में लाखों रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों पूर्व बनाए गए थे। चिलबिला अस्पताल में पूरे दिन आवारा मवेशियों का जमावड़ा रहता है और पास के लोग भूसा और उपली घर बना लिए हैं। कमोवेश यही हालत पौसिया चौहान केंद्र की है जहाँ लाखो रुपए की लागत के बाद यह जुआड़ियों का अड्डा बन कर रह गया। भवन खंडहर हो गया और खिड़की, दरवाजे लोग उखाड़ ले गए। यहाँ लोगों का सवाल है कि जब केंद्र संचालित नहीं किया जाना था तो सरकार के लाखों रुपए यहाँ क्यों खर्च किये गए।
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