श्रीराम कथा से धुल जाते हैं मन के मैल-स्वामी रामस्वरूपाचार्य
मेजा,प्रयागराज । पांती के सिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय मानस सत्संग समारोह में श्रीराम कथा महात्म्य पर चर्चा करते हुए जगत गुरु रामानंदाचार्य कामदगिरी पीठाधीस्वर स्वामी रामस्वरूपाचार्य ने कहा कि श्रीराम की कथा के प्रभाव से कलुषित मन पवित्र हो जाते हैं। यहां प्रभु श्रीराम के अलावा कोई निर्दोष नहीं है। मनुष्य के दोष दूर करने का एक ही रास्ता राम कथा ही है।
मानस प्रचारिणी समिति द्वारा आयोजित 57वें विराट मानस सत्संग समारोह में मानस मर्मज्ञों, संतों का जमावड़ा है। सत्संग समारोह मंच से कामदगिरी पीठाधीस्वर जगतगुरु रामानंदचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कथा विस्तार में कथा प्रेमियों को राम कथा के जीवन पर प्रभाव और कथा श्रवण से जीव कल्याण की विशद व्याख्या की है।
उन्होंने कहा कि बदलते दौर में विकास और विनाश के साथ उत्कर्ष और अपकर्ष को देखा गया है। मानव जीवन कितना ही शिखर पर पहुंच जाय, लेकिन उसका कल्याण श्रीराम कथा और भगवत भजन में ही निहित है। उन्होंने कहा कि कोई साधु, संत हों या आम लोग हों, सब में कोई न कोई दोष है। निर्दोष तो सिर्फ प्रभु श्रीराम ही हैं।
मानस प्रचारिणी समिति के सचिव विजयानन्द उपाध्याय ने सत्संग समारोह मंच पर स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज का गुरु परम्परा के रूप में सम्मान किया। पांती में चल रहे 57वें सत्संग समारोह पर चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि सोचिए जब यह कथा सत्संग शुरू किया गया होगा। समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। जरूरत है श्रीराम कथा को आत्मसात कर जीवन को सार्थक बनाएं।
सत्संग समारोह के आयोजक एवं मानस प्रचारिणी समिति के अध्यक्ष नित्यानंद उपाध्याय ने सभी कथा प्रेमियों से सत्संग से जुड़ने के लिए आग्रह किया है। आयोजन व्यवस्था की देखरेख समाजसेवी सिद्धान्त तिवारी व मनीष उपाध्याय के हाथ है। कथा को लेकर धर्मावलंबियों में उत्साह है।
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